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स्वदेशी मुस्लिम पर प्रश्नोत्तर – 1

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प्रश्नकर्ता: सभी को प्रणाम | स्वदेशी मुस्लिमों पर श्री राजीव मल्होत्रा-जी के साथ इस प्रश्नोत्तरी सत्र में आपका स्वागत है |

हर कोई राजीव मल्होत्रा-जी जानता है | इसलिए, मैं उनसे परिचय कराने में बहुत अधिक समय नहीं लेने वाला हूँ | वे 1994 से अब तक अर्थात् 24 वर्षों से इस विषय पर काम कर रहे हैं | एक रोचक समानांतर क्योंकि पिछले 24 वर्षों में सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में जो महत्वपूर्ण घटनाएं हुईं उन्हें विघटनकारी तकनीक कहा जाता है | आने वाली किसी भी नई तकनीक को विघटनकारी तकनीक कहा जाता है |

जहां तक श्री राजीव जी का संबंध है, वे एक विघटनकारी विचार प्रक्रिया लाते हैं | हम इसे देखते हैं उनके प्रत्येक व्याख्यान में, हर चर्चा में या उनकी पुस्तकों में | विषयों पर व्यापक शोध किया जाता है और वे आंकड़ों पर आधारित होते हैं | कुछ बहुत ही भेदक प्रश्न हैं और विघटनकारी विचार हैं | स्वदेशी मुसलमानों पर आज का विषय एक बहुत ही विघटनकारी विचार है |

मैं स्वदेशी मुस्लिम के विषय का परिचय नहीं दूंगा क्योंकि आप में से अधिकांश ने वीडियो देखा होगा | भेजे गए प्रश्नों के लिए बहुत बहुत धन्यवाद | कुछ प्रश्न आपके द्वारा भेजे गए होंगे | हमें 250 से अधिक प्रश्न प्राप्त हुए | मुझे इस सत्र में श्री राजीव मल्होत्रा जी और आप सभी का स्वागत करने की अनुमति दें |

नमस्कार राजीव जी | इस प्रश्नोत्तरी को स्वीकार करने के लिए धन्यवाद | हमारे आरम्भ करने से पहले क्या आप दर्शकों के साथ कुछ विचार साझा करना चाहते हैं ?

राजीव मल्होत्रा: हाँ | नमस्ते और मुझे आमंत्रित करने के लिए धन्यवाद | आरम्भ करने से पहले मैं इस पूरी चर्चा को कुछ संरचना देना चाहता हूँ |

आप में से कुछ ने व्याख्यान देखा होगा, परन्तु पुस्तक में बहुत कुछ है | यह बड़े अध्यायों में से एक है | मेरी पुस्तक में 10 या अधिक अध्याय हैं | भारतीय मुस्लिमों के बारे में यह विशेष अध्याय मेरी पुस्तक परियोजना भारतीय महागाथा का एक महत्वपूर्ण खंड है | मैंने इस शब्द को गढ़ा और कई वर्ष पहले इसके बारे में बात करना आरम्भ कर दिया | पिछले वर्ष मैंने इस विषय पर अपने कई व्याख्यान दिए | यह पहले से ही सार्वजनिक क्षेत्र में चर्चा में आ रहा है |

बहुत से लोग अब भारतीय महागाथा के बारे में बात कर रहे हैं | इस विषय पर कई सम्मेलन, सभाएं और संवाद हो रहे हैं | मुझे यह देखकर हर्षित हूँ | क्योंकि जब तक मेरी पुस्तक कुछ महीनों में आती है तब तक यह माहौल और अपेक्षाओं का निर्माण करता है | यदि मैंने कठिन प्रश्नों को संबोधित नहीं किया तो भारतीय महागाथा की परियोजना अधूरी होगी |

कई लोग जिन्होंने इस पद (भारतीय महागाथा) को अपनाया है, वेदों और भारतीय इतिहास की महानता के बारे में बात करते हैं जो कि एक महत्वपूर्ण भाग है | परन्तु जटिल मुद्दों को हल किए बिना आपके पास एक महागाथा नहीं हो सकती है | कम से कम कुछ प्रस्ताव रखें | कम से कम विचार प्रक्रिया के साथ आरम्भ करें | यदि आपके पास कोई समाधान नहीं है तो कम से कम समस्या को परिभाषित करें |

मैं इस पुस्तक में बहुत-सी बातों को रख रहा हूँ, भारतीय महागाथा के अंग के रूप में संबोधित किये जाने के लिए | उनमें से एक यह है कि किस प्रकार मुसलमान भारतीय महागाथा में फिट बैठते हैं | अन्यथा आपके पास कोई महागाथा नहीं है | इस विषय के महत्वपूर्ण होने का दूसरा कारण धरातल की वास्तविकता है |

भारत में यथास्थिति ने मुस्लिमों की स्वेच्छा से उन्हें पृथक बस्तियों में पहुंचा दिया है | हमने नहीं अपितु उन्होंने स्वयं को पृथक बस्ती में डाल रखा है | मैं दिल्ली और उत्तर प्रदेश के कई मुस्लिम मोहल्लों में गया हूँ | वे समय के साथ पृथक हो रहे हैं | लगभग एक स्वैच्छिक नस्लभेद की भांति | उनके अपने संस्थान | जामिया मीलिया के पास के क्षेत्र पाकिस्तान की भांति हैं | यह लाहौर में घूमने जैसा है |

यह प्रवृत्ति बढ़ रही है | यह एक अस्थिर संतुलन है – दीर्घकाल में टिकाऊ नहीं | समस्या को अनदेखा करना या इसके न होने का अभिनय करना क्योंकि यह असुविधाजनक है, संभवतः उन राजनेताओं के लिए अच्छा है जो त्वरित समाधान की खोज में हैं | और कुछ जटिल करने के लिए तैयार नहीं है | परन्तु यह बड़ी समस्याओं की ओर ले जाएगा |

दुनिया की भू-राजनीति को देखते हुए कोई देश पृथक नहीं है | 9/11 के बाद भारतीय मुसलमानों ने दावा किया कि वे भिन्न थे | कई ने कहा कि भारतीय मुस्लिम भिन्न हैं | हम इन कामों में लिप्त नहीं हैं | ठीक है संभवतः अब तक उस सीमा तक नहीं | परन्तु उन्होंने कुछ स्तर तक भाग लिया है | केवल इसे अनदेखा करना मेरे लिए स्वीकार्य नहीं है | आपको इसे संबोधित करना होगा |

उन्हें कुछ अर्थों में महागाथा का अंग बनना होगा | हमें इस प्रकार तय करना होगा ताकि कम से कम मुस्लिम शिक्षित वर्ग का एक निश्चित भाग इसका समर्थन करे | यह उन पर कुछ भी थोपा हुआ नहीं हो सकता है | यह बहुत कठिन है | निराशाजनक स्थिति में निकला सामान्य समाधान पूरी तरह से अस्वीकार्य है | जो कि कुरान और मदरसा पर प्रतिबंध लगाना है | यह गृह युद्ध के लिए एक नुस्खा है |

गृहयुद्ध कुछ ऐसा है जो आईएसआईएस और तालिबान को प्रसन्न करेगा | वे एक और अफगानिस्तान, इराक, सीरिया जैसे स्थान का निर्माण करना पसंद करेंगे | क्योंकि यह उनके लिए खेल का मैदान होगा | एक बार आप इसे आरम्भ करेंगे फिर यह नियंत्रण के बाहर चला जाएगा | इसलिए, मैं इसे अनुत्तरदायित्व से भरा मानता हूँ | मैं उस विकल्प को समाप्त कर रहा हूँ जिसका कई ने सुझाव दिया है | कि इनमें से कोई भी काम नहीं करेगा | कि हमें उन पर प्रतिबंध लगाने और कड़ाई से काम लेने की आवश्यकता है। मैंने इसे हटा दिया है |

मैंने उस दृष्टिकोण को भी हटा दिया है जो कहता है, कुछ नहीं करो | आपको कुछ करना होगा और हमें पता लगाना है | हो सकता है कि कोई अच्छा समाधान नहीं हो | संभवतः सभी विकल्प त्रुटिपूर्ण हैं, परन्तु कुछ और अधिक त्रुटिपूर्ण हैं | आपको कोई विकल्प चुनना होगा | यह वह कठिन परिस्थिति है जिसके साथ मैं आरम्भ कर रहा हूँ |

यह मानते हुए कि समाधान के रूप में कुछ प्रस्तुत किया जाना चाहिए, आप एक मानक बनाते हैं | जब उन्होंने आईएसओ मानक बनाया तो पहले दिन कोई भी अनुपालक नहीं था | धीरे-धीरे लोग अनुपालन करना आरम्भ कर दिए और यह कुछ महत्वपूर्ण बन गया | अब यह गर्व का प्रतीक है |

इसलिए हमें एक मानक या आदर्श की आवश्यकता है | या संभवतः स्वदेशी मुस्लिम के कई स्तर न्यूनतम से आदर्श तक | कम से कम एक वार्तालाप आरम्भ हो सकता है | और यह केवल स्वदेशी मुसलमानों के बारे में नहीं है, अपितु यह स्वदेशी ईसाईयों और स्वदेशी हिंदुओं के बारे में भी है | मेरी पुस्तक स्वदेशी ईसाइयों के बारे में बात करती है |

मैंने हाल ही में एक प्रमुख ईसाई नेता से बात की और वे सहमत हुए कि हमें इसे आरम्भ करना चाहिए | एक समान सूत्र होना चाहिए, हमें एक साथ रखने वाला | प्रायः जावेद अख्तर, शबाना आज़मी जैसे लोग और अन्य मुस्लिम नेता जो स्वयं को इस्लामी मत के संरक्षक के रूप में प्रचारित करना चाहते हैं एक मुद्रा अपनाते हैं जो मेरे लिए अस्वीकार्य है | वे कहते हैं कि प्रत्येक मुस्लिम को संविधान का पालन करना चाहिए | परन्तु ह्रदय, भावनाएं, भावनात्मक जुड़ाव और मनोवैज्ञानिक जुड़ाव कहां है ? केवल कानून का अनुपालन पर्याप्त नहीं है |

यह सहिष्णुता की भांति है | मैं आपका सहन करता हूँ | यह पर्याप्त नहीं है | आप केवल इतना नहीं कह सकते, कि मैं आपके परिवार का सदस्य हूँ और मैं एक कानून नहीं तोडूंगा | यह संभवतः ही कोई कथन है | मैं चाहता हूँ कि वे भावनात्मक महागाथा का भी भागीदार बनें कि हम कौन हैं, हमारे प्रतीक, हमारे नायक और हमारा इतिहास क्या है |

यह कहना कि एक भारतीय मुस्लिम वह है जो संविधान का अनुपालन करता है, मेरे लिए पर्याप्त नहीं है | हमें हम सभी के बीच एक सशक्त बंधन की आवाश्यकता है | हमें यह सुनिश्चित करने में वास्तविक लाभ है कि मुस्लिम हमारी भारतीय संस्कृति से निकटता से जुडें | उनका उन बहुत-से हिंदुओं की आलोचना करना, जो ऐसा नहीं हैं, भी उचित है |

उदाहरण के लिए तमिलनाडु में, तमिल हिंदुओं का एक बड़ा बहुमत इस आर्य-द्रविड़ विभाजन में विश्वास करता है | जो स्वदेशी सिद्धांत का उल्लंघन करता है क्योंकि यह देश की एकता का उल्लंघन करता है | कई हिंदू दलित भारत के विखंडन में लिप्त हैं | इसलिए पर्याप्त स्वदेशी न होना केवल एक मुस्लिमों की समस्या नहीं है | यह सबके साथ है |

तो यह अध्याय जिसके बारे में मैं बात कर रहा हूँ, स्वदेशी मुसलमानों पर है | अन्य मुद्दों पर अन्य अध्याय हैं |

मैंने भारत में इस्लामी शक्ति के पारितंत्र का विखंडन और विश्लेषण करने से आरम्भ किया | और मैंने देखा है और मेरे पास कई आरेख हैं | मैंने अपनी पुस्तक में इनमें से कई डाले हैं | जहां मैंने मापचित्र बनाया है कि इस्लामी संवाद में किसकी क्या भूमिका है और कौन क्या करता है | और हस्तक्षेप के कई क्षेत्र हैं |

एक घर वापसी है जो खुदरा स्तर पर है | आप एक समय में एक परिवार के पास जाते हैं और उन्हें धर्मान्तरित करने का प्रयास करते हैं | आपके पास उनके पक्ष के लोगों की एक न्यूनतम संख्या नहीं है जो कि गतिमान करने वाला प्रभाव उत्पन्न करेगा | आपको प्रत्येक परिवार या प्रत्येक व्यक्ति के पास एक-एक करके जाना होगा | यह एक अच्छी परियोजना है और समानांतर में जारी रहनी चाहिए | परन्तु मैं कुछ अधिक लाभकारी, एक बल गुणक के योग्य कुछ ढूंढ रहा हूँ |

और मैंने मुल्ला की पहचान की | वे आज के मुस्लिमों की वैचारिक पहचान के लिए बहुत सीमा तक उत्तरदायी हैं | मुसलमान स्वयं कहते हैं कि उनमें से अधिकतर लोग अशिक्षित हैं और मुल्ला पर उनकी पहचान देने के लिए निर्भर करते हैं | मुल्ला उन्हें बताता है कि हम कौन हैं और हम क्या मानते हैं | मुल्ला एक स्वार्थी व्यक्ति है और उसका कोई प्रतिरोध नहीं है | उन्हें जो कुछ कहा जाता है उसे मान लेते हैं |

स्थिति को ऐसी होने की आवश्यकता नहीं है | मैंने कुछ मुस्लिम बुद्धिजीवियों से भी बात की है जो मुझे बताते हैं कि यह मुल्ला-साम्राज्य एक नई संस्था है जो कुरान के प्रारंभिक वर्षों में ऐसा नहीं था | कुरान कहता है कि इस्लाम का पालन एक व्यक्ति के रूप में अपनी निजी क्षमता के आधार पर अल्लाह के साथ अपना सम्बन्ध है | इसमें एक मध्यस्थ के रूप में किसी संस्था या बिचौलिए की आवश्यकता नहीं है | आप कभी मस्जिद बिना गए और अपने घर से प्रार्थना करते हुए भी एक पूर्ण रूपेण अनुपालन करने वाला मुस्लिम हो सकते हैं |

बिचौलियों को हटाने का पूरा विचार ईसाई धर्म के चर्च से भिन्न, इस्लामी शिक्षाओं का एक बहुत ही महत्वपूर्ण अंग था | उन्होंने अनुभव किया कि वैसे तो यहूदी और ईसाई धर्मों में, अच्छे वैध पैगम्बर थे, परन्तु मनुष्यों का बहुत अधिक हस्तक्षेप था, जिन्होंने इन शक्ति-संरचनाओं का निर्माण किया था और संस्थानों का | इसलिए, अल्लाह को एक नया जनादेश देने की आवश्यकता थी, जिसका अब इन संस्थानों द्वारा अपहरण कर लिया गया है |

इस्लाम के भीतर मत हैं जो मध्यस्थों की शक्ति संरचना को विघटित करना चाहते हैं | और हस्तक्षेप का विषय मुल्ला ही होना है | इसके बारे में बात करने के लिए बहुत कुछ है, परन्तु मैं बस आपको थोड़ा-बहुत बताऊंगा कि अमेरिका में कई प्रयोग चल रहे हैं | हमें उनकी नक़ल करने की आवश्यकता नहीं है, परन्तु हम उनसे सीख सकते हैं | उनके पास ये अच्छी सिपाही और बुरे सिपाही होते हैं | हमारे पास साम, दाम हैं जो सकारात्मक, रचनात्मक दृष्टिकोण हैं, लोगों को जीतने के लिए | भेद, दण्ड बुरा सिपाही है – जाने और वास्तव में उनपर कठोर आघात करने के लिए | वे दोनों कर रहे हैं |

लगभग प्रत्येक मस्जिद में घुसपैठ बना ली गयी है, वे निगरानी में है | 9/11 के बाद से, स्वदेशी मुसलमानों के अमेरिकी समकक्ष का क्रमिक विकास हुआ है | लोग जो देशभक्त हैं | कई ईसाई-मुस्लिम और यहूदी-मुस्लिम संवाद चल रहे हैं | अपने शुक्रवार के उपदेशों में इमाम अमेरिकी ध्वज और राष्ट्रगान के महत्व को सिखाते हैं | स्कूलों में कई मुस्लिम स्वयं को पहले एक अच्छे अमेरिकी के रूप में दिखा रहे हैं | यह एक विरोधात्मक मत के रूप में बन गया है | कट्टरपंथी मुल्ला अभी भी वहां हैं | वे सरलता से नहीं हटेंगे | परन्तु उन्हें रोकने के लिए संस्थागत प्रक्रियाएं स्थान पर हैं |

परन्तु भारत में ऐसा कोई कार्यक्रम नहीं है | कम से कम उनके पास सकारात्मक मुल्लाओं को तैयार करने और सशक्त बनाने के लिए कार्यक्रम हैं | एक आन्दोलन चल रहा है जिसे इस्लामी सुधार आंदोलन कहा जाता है | कुछ पाकिस्तानी मुस्लिम खुले तौर पर कहते हैं कि वे इस इस्लामी सुधार आंदोलन का अंग हैं |

ईसाई धर्म में चर्च और राज्य को पृथक करने के लिए एक सुधार आंदोलन था | इससे पहले, ईसाई बिशपों के पास फतवा की शक्ति थी | वे शासन-व्यवस्था देख सकते थे, किसी को गिरफ्तार कर सकते थे, किसी को मृत्युदंड दे सकते थे और किसी को मार सकते थे | यह एक हज़ार से अधिक वर्षों तक ईसाई धर्म का अंग था | यह सुधार आंदोलन 200 वर्षों तक चलता रहा – ईसाई धर्म के भीतर रक्तपात से भरा आंतरिक गृहयुद्ध हुआ | इस्लाम को यह करना है | अन्य देशों में मुसलमान हैं, जो प्रक्रिया आरम्भ करना चाहते हैं |

हमने राजनीतिक उद्देश्यों के लिए उन्हें बहुत अधिक लाड-प्यार दिया है | इन विरोधी-मुलाओं को सता में लाने के स्थान पर और प्रशिक्षण संस्थान, भिन्न प्रकार के मदरसों, और धार्मिक शिक्षा केन्द्रों के स्थान पर हम राजनेताओं के साथ अवसरवादी समझौते कर रहे हैं | कश्मीर में, यह केवल अवसरवादी राजनेताओं का एक समूह है जो कभी इस दिशा में और कभी उस दिशा में जाता है |

ये प्रयोग जुगाड़ की भांति हैं | भारत की समस्या है कि एक व्यवस्थित, दीर्घकालिक और साहसी दृष्टिकोण अपनाने के स्थान पर किसी समस्या से निपटने के लिए राजनीतिक जुगाड़ लगा रहे हैं | और कुछ निवेश कर रहे हैं जिसका लम्बे समय में परिणाम आएगा |

तो, मैं, यह नहीं कह रहा हूँ कि अमेरिका इस समस्या का हल कर सकता है | परंतु कम से कम एक प्रणालीगत मुद्दे के रूप में इससे निपटने के सन्दर्भ में, हम उनसे सीख सकते हैं |

यह मेरा मूल विचार है | मैं एक प्रस्ताव देना चाहता हूँ – इस्लाम पर रचनात्मक और विघटनकारी हस्तक्षेप | रचनात्मक स्वदेशी मुस्लिम है | यह एक गाजर और छड़ी की भांति है | यहां कुछ ऐसा है जो हमें साथ करना चाहिए |

विघटनकारी है कि हमें मुल्लों पर भी आक्रमण करना चाहिए, अपने पक्ष में भिन्न प्रकार के मुल्लों के साथ | हमें कुरान के कट्टरपंथी विचार लेने चाहिए और उनका भिन्न प्रकार से व्याख्या करना चाहिए | मौलाना आजाद केवल एक उदाहरण हैं, परन्तु वैश्विक स्तर पर कई लोग थे |

इस्लाम के भीतर कई मत हैं जो कट्टरपंथ से छुटकारा पाने के बारे में बात करते हैं क्योंकि उन्हें इसका अनुभव है, आधुनिक, वैज्ञानिक सोच वाले मुसलमान के रूप में, जो अच्छे जीवन का आनंद ले रहे हैं, उनमें से कुछ बहुत पैसा कमा रहे हैं, उद्योगपति के रूप में, आधुनिकता के अनुयायी के रूप में, उनके पास मुल्लों द्वारा अधिग्रहण किये जाने पर खोने के लिए बहुत कुछ है | वे भी अनुभव करते हैं कि गैर-मुस्लिम विश्व की ओर से कुछ करने का दबाव है |

यद्यपि यह पूर्णरूपेण निराशाजनक नहीं है, यह सरल भी नहीं है | यह एक बहुत लंबी लड़ाई होगी | मैं यह कहकर कि ‘चलिए हम एक संवाद आरम्भ करते हैं’, अधिक विपत्ति अधिक प्रतिफल वाला मार्ग अपना रहा हूँ | चलिए एक ढांचा बनाएं और परिभाषित करें कि ऐसा अनुभव करने में कैसा लगेगा कि हमारे मुस्लिम भाई-बहन स्वदेशियों के समान हैं |

स्वदेशी मुस्लिम रचनात्मक भाग है | मुल्ला के विरुद्ध जिहाद विघटनकारी | मैं उस शब्द का निर्माण कर रहा हूँ – मुल्लों के विरुद्ध जिहाद | जिस प्रकार प्रतिरोधी आतंकवाद और प्रतिरोधी अलगाववाद है, उसी प्रकार प्रतिरोधी जिहाद भी होना चाहिए |

अन्य लोगों के विरुद्ध प्रतिरोधी जिहाद का समर्थन करने के लिए हमें सकारात्मक मुल्लों की आवश्यकता है | यह एक आंतरिक विषय होना चाहिए एक प्रकार के मुस्लिम और दूसरे के बीच, ईसाई धर्म के भीतर हुए बड़े संघर्ष के समान | जिसने सुधार लाया |

हमें न तो बहुत नकारात्मक होना चाहिए कि यह काम नहीं करेगा न ही कहना चाहिए कि हम लड़ना नहीं चाहते हैं | हमें वार्तालाप आरम्भ करना चाहिए और मेरी पुस्तक मेरे लिए ऐसा करने का अवसर है |

मोहम्मद के बारे में एक स्वदेशी मुस्लिम का विचार क्या है ? वे स्वदेशी के विचार और मोहम्मद में एक आदर्श व्यक्ति के अपने विचार के बीच सामंजस्य कैसे बिठाते हैं ?

मुस्लिम विद्वानों द्वारा कुरान की कोई व्याख्या या पुनर्व्याख्या की जानी है | मेरे द्वारा नहीं | मेरी भूमिका उन्हें यह बताने की है कि ये सीमाएं हैं | यदि आप मुझे एक काफ़िर कहते हैं और मेरे विरुद्ध जिहाद घोषित करते हैं, तो यह एक समस्या है और मैं स्वीकार नहीं करूंगा | मेरे पास तब आपकी आलोचना करने का अधिकार है | आप किसी भी व्याख्या के साथ आयें ताकि मेरी स्थितियों को पूरा किया जा सके |

मैं पारस्परिक सम्मान का प्रस्ताव रख रहा हूँ | पारस्परिक सम्मान के सृजन के लिए कुरान की व्याख्या कैसे करें, यह आपका काम है | मैं ये क्यों बताऊँ ? अब मैंने यह बहुत-से मुस्लिम बुद्धिजीवियों को कहा है – मैंने आपसे परस्पर सम्मान का प्रस्ताव रखा, क्या आप इसे इस रूप में स्वीकार करते हैं ? वे प्रायः करते हैं | तब मैं उन्हें बचाव पक्ष की ओर ले गया | कुरान के इस कथन के बारे में क्या ? फिर वे एक नई व्याख्या के साथ आते हैं |

मैं कहता हूँ, अच्छा | इसे अब सार्वजनिक करें | बहुत से आलोचकों ने कहा है कि आपको इसकी आवश्यकता है कि कुरान या मोहम्मद के बारे में इस या उस समस्या का हल करें | मैं समस्या का हल क्यों करने जा रहा हूं ? ये मुसलमान हैं जिन्हें अपनी परंपरा को दोबारा परिभाषित करना है |

मुसलमानों ने मुझे जो बताया है वे दो समाधान हैं | एक है, जो अधिक आम समाधान है वो यह कि मोहम्मद के जीवन को शाब्दिक रूप में लेना और आज पर लागू नहीं करना चाहिए | क्योंकि मोहम्मद का जीवन उस संदर्भ में था | वे इस प्रकार संदर्भित करने को तैयार हैं जिससे कि वे एक आदर्श व्यक्ति हैं | कारण कि हमसे उनका सम्मान और उनके जीवन का अनुसरण करने की अपेक्षा की जाती है क्योंकि वे सर्वश्रेष्ठ मुस्लिम माने जाते हैं और हमें एक आदर्श व्यक्ति का अनुसरण करके विचार मिलते हैं | परन्तु वे उस संदर्भ में सर्वश्रेष्ठ हैं |

वे स्वयं मुझे बताते हैं कि युद्ध हुआ करते थे | इसलिए उन्हें कई महिलाओं से विवाह करना पड़ा | उस संदर्भ में कई बातें थीं जो आज लागू नहीं होती हैं | यदि मुस्लिम मोहम्मद के जीवन को संदर्भित करने के इच्छुक हैं, तो हमें उन्हें क्यों रोकना चाहिए ?

प्रश्नकर्ता: उसी संदर्भ में अगला प्रश्न | क्या स्वदेशी मुस्लिम की अवधारणा इस सिद्धांत पर आधारित है कि भूखे रहने कितुलना में आधी रोटी बेहतर है ?

राजीव मल्होत्रा: हाँ | कोई अच्छा समाधान नहीं है | बुरे समाधान हैं और उनसे भी बुरे समाधान हैं | कुछ भी नहीं करना सबसे बुरी बात है | इससे भी बुरी बात है मुसलमानों के साथ गृहयुद्ध आरम्भ करना और देश में आईएसआईएस को आमंत्रित करना | कई विकल्प हैं – कुछ दूसरों की तुलना में बेहतर हैं |

जब तक कि वे क्षति नहीं पहुंचाते हैं और हम लोगों का एक छोटा सा प्रतिशत तैयार कर रहे हैं, जो स्वदेशी मुसलमान हैं | हम संस्थाओं, अनुसंधान के नए केंद्रों और सीखने के लिए उन्हें पोषित, प्रोत्साहित करते हैं और उन्हें निधि देते हैं | नए प्रकार के मदरसों के लिए | अमेरिका में वे नए मुस्लिम शिक्षण केंद्र स्थापित कर रहे हैं | इनमें से कुछ कामों के लिए अमेरिकी वित्त पोषण है |

मुझे नहीं पता कि भारत सरकार ऐसा कर रही है या नहीं – हम बहुत डरे हुए हैं | हम इस प्रश्न को उठाने से भी इतना डरते हैं कि हम इसे छूना नहीं चाहते हैं और हम इसे आउटसोर्स कर देते हैं कश्मीर में उमर अब्दुल्ला जैसे लोगों को |

प्रश्नकर्ता: अगला प्रश्न वास्तव में प्रोफेसर गोविंद सदाशिव घुर्ये का उद्धरण देता है एक सुप्रसिद्ध समाजशास्त्री | उन्होंने भारत में मुसलमानों को मुस्लिम भारतीय के रूप में पुकारा, न कि भारतीय मुस्लिम, क्योंकि उन्होंने सोचा कि वे मुख्य रूप से मुस्लिम हैं और फिर भारतीय हैं | उन्होंने भारत में मुसलमानों की पहचान के तीन स्तरों को देखा, अखिल- इस्लामी, उपमहाद्वीपीय और फिर राष्ट्रीय (स्वदेशी ?) | उन्होंने अनुभव किया कि भारत में मुस्लिम राष्ट्रीय पहचान की तुलना में अखिल-इस्लामी और उपमहाद्वीपीय पहचानों से अधिक प्रेरित हैं | क्या आप इस बात से सहमत हैं ? क्या स्वदेशी मुस्लिम आंदोलन प्रोफेसर घुर्ये की टिप्पणियों में दिखाए गए आशंकाओं को दूर करेगा ?

राजीव मल्होत्रा: यह एक दोषपूर्ण विचार है जो वे प्रस्तुत कर रहे हैं | वह एक दारूल इस्लाम के दावे को आगे बढ़ा रहे हैं कि वे पहले मुसलमान हैं | मुझे आश्चर्य नहीं है यह जानकार कि वे वामपंथी है | मैं निश्चित रूप से इससे असहमत हूँ |

मैंने तुर्की में बहुत समय बिताया और वहां कई लोगों से बात की साक्षात्कार लिया | जब आप उन्हें ईरानियों या अरबों के साथ मिला देते हैं तो वे बहुत दुखी हो जाते हैं | तुर्कों ने कहा कि हम मुस्लिम हैं, परन्तु हमारा अरबों या ईरानियों के साथ कुछ लेना देना नहीं है | हम कुरान और मोहम्मद का सम्मान करते हैं, परन्तु हम तुर्क हैं और अपने देश के प्रति निष्ठावान |

ईरान का इन दोनों में से किसी के साथ कुछ लेना देना नहीं है | इसीलिए अरब और ईरानी विश्व के बीच शिया-सुन्नी का विभाजन इतना बड़ा है | ईरान शिया पक्ष का प्रतिनिधित्व करता है | इसलिए अरब, तुर्क और ईरानी – प्रत्येक दावा कर सकते हैं कि वे पक्के मुसलमान हैं परन्तु वास्तव में वे किसी भी अंतरराष्ट्रीय वैश्विक आंदोलन का भाग नहीं हैं |

इसका अभिप्राय है कि भारतीय मुसलमान उपनिवेशित हैं | उपनिवेशित के रूप में अरबों और ईरानियों द्वारा, जिस प्रकार कि हम सभी अंग्रेजों द्वारा उपनिवेशित हैं | अर्थात् वि-उपनिवेशीकरण में इस्लामी वि-उपनिवेशीकरण अवश्य सम्मिलित होना चाहिए |

यहां आपको यह बताने का एक अच्छा अवसर भी है कि अशरफ मुस्लिम, समस्या हैं | वे आपको बताते हैं कि कोई जाति व्यवस्था नहीं है, परन्तु वास्तव में है | इस्लाम की जाति व्यवस्था अभिजात वर्ग के रूप में अशरफ की पहचान के साथ आरम्भ होती है | तब फिर अजराफ़ मूल भारतीय हैं जो धर्मान्तरित हो गए हैं |

अशरफ में भी अपनी उप-जातियां हैं | सय्यद सर्वोच्च हैं | वे पैगम्बर के प्रत्यक्ष वंशज हैं | मैंने प्रमाणित करने के लिए कई सैय्यदों को डीएनए परीक्षण कराने की चुनौती दी है और किसी ने अभी तक मेरी चुनौती का सामना नहीं किया है | मैंने उनसे कहा कि मैं आपको एक अच्छा अनुदान दूंगा ताकि आप इसे वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित कर सकें | फिर शेख हैं, अरब अभिजात वर्ग के वंशज | अन्य जातियों के नाम पठान, तुर्क और मुगल हैं | वे सभी अशरफ हैं | विदेशी |

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