आर एस एस/मोहन भागवत से रहस्य हटाना

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भारत की और विश्व की भी एक महत्वपूर्ण संस्था है | पर उसकी छवि बहुत विवादास्पद और रहस्यों से घिरी रही है | उसे निकट से जानना आवश्यक है | मेरी छवि एक निष्पक्ष और वस्तुपरक प्रेक्षक की है, संभवतः इस कारण से मुझे संघ के सर्वोच्च नेताओं से सीधे मिलने का […]

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बुद्धिजीवी और आरएसएस/मोहन भागवत

राजीव मल्होत्रा: मैं दो विषयों पर आपके विचार जानना चाहूँगा | एक है, हिंदुओं को अधिक बौद्धिक बनाना | और दूसरा है, बौद्धिकों को अधिक हिंदू बनाना | पहली स्थिति के लिए हमें खुला मन रखने वाले बौद्धिकों को ढूँढ़ना होगा | कई अच्छे हिंदू संघ के बारे में दोषपूर्ण धारणा रखते हैं | मेरे […]

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भारत में विचारधारा की लड़ाई / मोहनदास पाई — 2

-> भारत में विचारधारा की लड़ाई / मोहनदास पाई — 1 राजीव मल्होत्रा: अमरीका के अश्वेत लोग यह कर रहे हैं | मोहनदास पाई: यहूदियों और अश्वेतों ने यह किया है | यहूदियों के नर-संहार की स्मृति को जीवंत रखने के लिए जो स्मारक बने हैं, उन्हीं की भांति हमें भी अपने मन के गर्तों में […]

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मुस्लिम और आरएसएस / मोहन भागवत

राजीव मल्होत्रा: मैंने एक नए विचार का सूत्रपात किया और एक नया शब्द गढ़ा जिसे मैं आपसे चर्चा करना चाहता हूँ | स्वदेशी मुस्लिम या कोई व्यक्ति जो इस्लाम को मानता है परन्तु यह भी मानता है कि यह मेरा स्वदेश है – मेरे पूर्वजों की भूमि | हिंदू मेरे भाई हैं और हमारा इस्लाम […]

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भारत में विचारधारा की लड़ाई / मोहनदास पाई — 1

राजीव मल्होत्रा: हम विदेशी आक्रमणकारियों के बारे में बात कर रहे थे | भारत क्यों विदेशी आक्रमणकारियों के सामने बारबार घुटने टेकता था, इसका क्या हमने भली-भाँति विश्लेषण किया है और इसे समझ लिया है, ताकि हम अपनी त्रुटियों को आगे भी न दुहराएँ ? या विदेशी आक्रमणकारियों के सामने हारने की उतनी ही संभावना […]

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संस्कृति और आर्थिक सशक्तीकरण – मोहनदास पाई के साथ चर्चा

राजीव मल्होत्रा: संस्कृति और अर्थव्यवस्था परस्पर संबंधित हैं | क्या आपको लगता है कि वैश्वीकरण, संयोजकता (कनेक्टिविटी), पश्चिमीकरण, निगमीकरण और सेंसेक्स केंद्रित अर्थव्यवस्था ने हमारी संस्कृति पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है ? मोहनदास पाई: हमारी संस्कृति पर इसका प्रभाव इस सीमा तक है कि हम मानते हैं कि पश्चिम हमसे श्रेष्ठतर है | क्यों ? […]

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डॉ नागास्वामी द्वारा धर्मशास्त्र और तिरुक्कुरल की तुलना

राजीव मल्होत्रा: हम सुनते रहते हैं कि आर्य लोग आए और आक्रमण किया, हम द्रविड़ हैं, पीड़ित हैं | हम संस्कृत नहीं चाहते क्योंकि हम बाइबल के निकट हैं | यह पूरा बकवास है | केवल हाल के दिनों में डॉ नागास्वामी और कुछ अन्य लोगों ने इसका उत्तर देकर अपना काम किया है | […]

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वन और रेगिस्तान की सभ्यताएँ

मैंने अपनी पुस्तक, ‘विभिन्नता: पश्चात्य सार्वभौमिकता को भारतीय चुनौती’, में चर्चा की है कि कैसे “अव्यवस्था” और “व्यवस्था” के बीच संतुलन एवं साम्यावस्था लाने का एक निरंतर प्रयास (न कि अव्यवस्था का संपूर्ण उन्मूलन) भारतीय दर्शन, कला, पाक-प्रणाली, संगीत एवं काम-विद्या को

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भारत के प्राचीन पुरातात्विक स्थान

14 जून २०१६ – राजीव मल्होत्रा जी का फेसबुक लाइव इवेंट नमस्ते भारतवासियों, मुझे वापस आकर बड़ी ख़ुशी हो रही है, और आज का विषय भी बड़ा रोचक है। इसका सम्बन्ध भारत की विरासत से जुड़ा हुआ है। आज हम चर्चा करेंगे भारत के उन प्राचीन शहरों, मंदिरों व अन्य मुख्य पुरातात्विक (archaeological) स्थानों की, […]

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प्रथम स्वदेशी इंडोलोजी कांफ्रेंस – राजीव मल्होत्रा जी के भाषण के अंश

करीब २० साल पहले इन्फिनिटी फाउंडेशन ने यह समझना चाहा कि अमेरिकी अकेडेमिया में भारत से सम्बंधित विषयों पर क्या और कैसा शोध होता है? इसलिए हमने उन जगहों को पैसा देना शुरू किया जहाँ भारत से सम्बंधित विषयों पर अध्ययन हो रहा था – हार्वर्ड, कोलंबिया यूनिवर्सिटी आदि। हमारा मूल विचार था कि वे […]

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