नूतन उपनिवेशिता की अक्षरेखा – 1

“आधुनिक सार्वभौमिक स्थिति में, पूर्वी एवं पश्चिमी ‘साभ्यता‘ एक दुसरे से समान सहयोगी के रूप में नहीं भेंट कर सकते हैं. वे पश्चिमी संसार में, पश्चिमियों द्वारा निर्मित विचार की परिस्थितियों में ही भेंट कर सकते हैं I “— डब्लू. हॉलब्फास [१] ये निबंध चर्चा करता है कि, कैसे बुद्धिजीवी स्वराज मूल सिद्धान्त है, किसी […]

Continue Reading

धर्म, रिलिजन के समान नहीं है

Translation Credit: Vandana Mishra. “धर्म” शब्द के बहुभागी अर्थ हैं जो सन्दर्भों के आधार पर निर्भर होते हैं जिसमें उनका प्रयोग होता है I इनमें सम्मिलित हैं: आचरण, कर्तव्य, उचित, न्याय, धर्माचरण, नैतिकता, रिलिजन, धार्मिक गुण, उचित कार्य जो अच्छे या बुरे कर्मों के अनुसार निर्धारित होते हैं, इत्यादि I कई अन्य अर्थ भी सूचित […]

Continue Reading

पश्चिमी सर्वभौमिकता को चुनौती

Translation Credits: Vandana Mishra. मेरी पुस्तक बीइंग डिफरेंट, ऐन इंडियन चैलेंज टू वेस्टर्न यूनिवर्सलिज़म (हार्पर कॉलिंस, २०११) का मुख्य उदेश्य है, पश्चिमियों के सार्वभौमिकता के दृण कथन का विखंडन करना I इन दृण कथनों के अनुसार, पश्चिम इस विश्व के इतिहास के संचालक भी हैं और अन्तिम, एषणीय गंतव्य स्थान भी है I पश्चिमी अनुमानतः […]

Continue Reading

यूरोपियों द्वारा संस्कृत के दुरुपयोगों ने आर्यन कुल सिद्धांत के मार्ग दर्शाये

Translation Credits: Vandana Mishra. ये विस्तृत रूप से ज्ञात नहीं है कि, यूरोपियों की इच्छा, संस्कृत के पुरातन आध्यात्मिक ग्रंथों के श्रेष्ठ मूल्यवान ग्रन्थालय के विनियोजन कार्य ने प्रेरित किया “आर्यन” कुल की व्यष्टिव के निर्माण को, जो नज़िस्म के विचारधारा का मूल आधार बना I संस्कृत शब्द “आर्य” एक विशेषण है जिसका अर्थ है  […]

Continue Reading

गीता का आतंकवाद के विरुद्ध युद्ध — 2

Translation Credit: Vandana Mishra. To Read First Part, Click Here. इस्लाम के विरुद्ध इस्लाम गीता का धर्म अथाह आत्म-परीक्षण पर आधारित है I महाध्यापक अकबर अहमद, ने नियुस-वीकली-रिसेंटली में उद्धरण किया है कि, सभ्यताओं के मध्य का संघर्ष इस्लाम और इस्लाम के मध्य का संघर्ष है—उदारवादियों और कट्टरपंथियों के विरुद्ध का है। इस्लामी विद्द्वानों को […]

Continue Reading

गीता का आतंकवाद के विरुद्ध युद्ध — 1

Translation Credit: Vandana Mishra. भगवत गीता में, ईश्वार प्रकट होते हैं मनुष्य के रूप में, कृष्ण के रूप में, अर्जुन को मार्ग दर्शन देने के लिए कि, युद्ध हो / युद्ध ना हो की असमंजस पूर्ण स्थिति, जिसका अर्जुन सामना कर रहे थे I संभवतः हिन्दुओं के ये १८ सर्वोच्च पावन पाठ क्या शिक्षा देते […]

Continue Reading

वन और मरुस्थल की सभ्याता

Translation Credit: Vandana Mishra. मेरी नूतनकालीन पुस्तक, बीइंग डिफरेंट: पश्चिमी सार्वभौमिकता को एक भारतीय चुनौती (२०११, हार्पर कॉलिंस, भारत) में, मैंने चर्चा किया है कि, कैसे लगातार “अव्यवस्था” और “व्यवस्था” के बीच की शक्तियों में संतुलन एवं साम्यावस्था को स्थापित करने का प्रयास किया जाता है (अपेक्षाकृत, पूर्ण अव्यवस्था का विध्वंस) जो कि, पारगमनीय है […]

Continue Reading

सर्वोच्च न्यायालय के लिए हिन्दू धर्म का परिचय — मधु पंडित दास (Part 1)

राजीव मल्होत्रा: तो, परम सत्य कोई व्यक्ति है | मधु पंडित दास:हाँ | राजीव मल्होत्रा: मैं इससे सहमत हूँ | तो, अब हमें बताएं…यह व्यक्ति विभिन्न रूपों में प्रकट होता है | मधु पंडित दास:सही | राजीव मल्होत्रा: और जो भी है उन सभी रूपों में | मधु पंडित दास:सही | राजीव मल्होत्रा: यदि यह […]

Continue Reading

कृष्ण मंत्र का सिद्धांत — पंडित मधु दास

राजीव मल्होत्रा: हरे कृष्ण मंत्र की विधि के बारे में बताएं |इसके पीछे का सिद्धांत क्या है ? यह मंत्र जो करता है वह वास्तव में यह कैसे करता है ? मधु पंडित दास: आइए शास्त्रों पर चलते हैं | कली-संतरण उपनिषद है, जो कृष्ण यजुर्वेद का अंग है |वहां यह मंत्र इस विशेष रूप […]

Continue Reading

विज्ञान के परे ज्ञान

राजीव मल्होत्रा: आइए, परम सत्य, सर्वोच्च व्यक्ति – ईश्वर और किस प्रकार वे विभिन्न भगवानों जैसे श्री कृष्ण, शिव, देवी आदि से संबंधित हैं, के साथ आरम्भ करते हैं | तब हम इसे वहां से आगे ले जा सकते हैं | मधु पंडित दास: किसी विशिष्ट उत्तर में जाने के पहले, मैं एक बहुत ही […]

Continue Reading