वन और रेगिस्तान की सभ्यताएँ

मैंने अपनी पुस्तक, ‘विभिन्नता: पश्चात्य सार्वभौमिकता को भारतीय चुनौती’, में चर्चा की है कि कैसे “अव्यवस्था” और “व्यवस्था” के बीच संतुलन एवं साम्यावस्था लाने का एक निरंतर प्रयास (न कि अव्यवस्था का संपूर्ण उन्मूलन) भारतीय दर्शन, कला, पाक-प्रणाली, संगीत एवं काम-विद्या को

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भारत के प्राचीन पुरातात्विक स्थान

14 जून २०१६ – राजीव मल्होत्रा जी का फेसबुक लाइव इवेंट नमस्ते भारतवासियों, मुझे वापस आकर बड़ी ख़ुशी हो रही है, और आज का विषय भी बड़ा रोचक है। इसका सम्बन्ध भारत की विरासत से जुड़ा हुआ है। आज हम चर्चा करेंगे भारत के उन प्राचीन शहरों, मंदिरों व अन्य मुख्य पुरातात्विक (archaeological) स्थानों की, […]

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प्रथम स्वदेशी इंडोलोजी कांफ्रेंस – राजीव मल्होत्रा जी के भाषण के अंश

करीब २० साल पहले इन्फिनिटी फाउंडेशन ने यह समझना चाहा कि अमेरिकी अकेडेमिया में भारत से सम्बंधित विषयों पर क्या और कैसा शोध होता है? इसलिए हमने उन जगहों को पैसा देना शुरू किया जहाँ भारत से सम्बंधित विषयों पर अध्ययन हो रहा था – हार्वर्ड, कोलंबिया यूनिवर्सिटी आदि। हमारा मूल विचार था कि वे […]

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धर्म ‘इतिहास–केंद्रीयता’ की उपेक्षा करता है

अब्राहमी मतों (ईसाई, यहूदी, इस्लाम)से संबंधित अधिकांश संघर्ष और युद्ध इस मतभेद से उत्पन्न हुए हैं कि ईश्वर ने वास्तव में क्या कहा और उसने ऐसा कैसे कहा और उसका मतलब वास्तव में क्या था।व्यवस्था बनाए रखने के लिए “प्रामाणिक” ग्रंथों के मानदंड बनाए गए और क्रीड, अथवा महत्वपूर्ण अभिकथनों और विश्वासों के संगठित रूप, […]

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‘होली स्पिरिट’, ‘शक्ति’ अथवा ‘कुण्डलिनी’ के सामान नहीं है

सभी धर्मों में समानता की तलाश करने के दौरान, अक्सर ईसाई धर्म की ‘होली स्पिरिट’ की तुलना हिन्दू धर्म की शक्ति अथवा कुण्डलिनी के साथ की जाती है | यद्यपि, ये दोनों पद भिन्न भिन्न और प्रायः विसंगत तत्वमिमांसाओं का निरूपण करते है | प्रारंभिक वैदिक साहित्य एक परमसत्ता (शक्ति) का वर्णन करता है, जिसकी […]

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