यदि सब मिथ्या और माया है तो परिश्रम करने से क्या लाभ?

एकात्मकता (Oneness), सब समान है, कोई अंतर नहीं है, आदि, यह बातें किस स्तर पर सही हैं? यह उस स्तर की बातें हैं, जब हम चेतना के अलग ही धरातल पर होते हैं। इस धरातल पर कोई देवता नहीं है और कोई असुर नहीं है। उस धरातल पर कोई महाभारत नहीं हो रहा है। वहां […]

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धर्म ‘इतिहास–केंद्रीयता’ की उपेक्षा करता है

अब्राहमी मतों (ईसाई, यहूदी, इस्लाम)से संबंधित अधिकांश संघर्ष और युद्ध इस मतभेद से उत्पन्न हुए हैं कि ईश्वर ने वास्तव में क्या कहा और उसने ऐसा कैसे कहा और उसका मतलब वास्तव में क्या था।व्यवस्था बनाए रखने के लिए “प्रामाणिक” ग्रंथों के मानदंड बनाए गए और क्रीड, अथवा महत्वपूर्ण अभिकथनों और विश्वासों के संगठित रूप, […]

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