भारत में विचारधारा की लड़ाई / मोहनदास पाई — 1

राजीव मल्होत्रा: हम विदेशी आक्रमणकारियों के बारे में बात कर रहे थे | भारत क्यों विदेशी आक्रमणकारियों के सामने बारबार घुटने टेकता था, इसका क्या हमने भली-भाँति विश्लेषण किया है और इसे समझ लिया है, ताकि हम अपनी त्रुटियों को आगे भी न दुहराएँ ? या विदेशी आक्रमणकारियों के सामने हारने की उतनी ही संभावना […]

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संस्कृति और आर्थिक सशक्तीकरण – मोहनदास पाई के साथ चर्चा

राजीव मल्होत्रा: संस्कृति और अर्थव्यवस्था परस्पर संबंधित हैं | क्या आपको लगता है कि वैश्वीकरण, संयोजकता (कनेक्टिविटी), पश्चिमीकरण, निगमीकरण और सेंसेक्स केंद्रित अर्थव्यवस्था ने हमारी संस्कृति पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है ? मोहनदास पाई: हमारी संस्कृति पर इसका प्रभाव इस सीमा तक है कि हम मानते हैं कि पश्चिम हमसे श्रेष्ठतर है | क्यों ? […]

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