भारतीय इतिहास की कुछ अंतर्दृष्टियां / मीनाक्षी जैन – 3
मीनाक्षी जैन: और कई भारत की सराहना करते थे | राजीव मल्होत्रा: हमारे पास त्रुटिपूर्ण छवि है कि ईस्ट इंडिया कंपनी ईसाई धर्मप्रचार के लिए थी | ऐसा इसलिए है क्योंकि हमारे लोगों ने
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Continue ReadingTo Read First Part, Click Here. मीनाक्षी जैन: अधिकाँश मुस्लिम हिंदुओं, को उनके लिए इसके महत्व के कारण, यह स्थल सौंप देना चाहते थे | परन्तु वे बताते हैं कि वामपंथी इतिहासकारों के एक समूह ने उन्हें विश्वास दिलाया कि ऐसा नहीं करें | राजीव मल्होत्रा: अर्थात् ये वामपंथी हैं जिन्होंने हिंदुओं और मुसलमानों के […]
Continue ReadingTo Read First Part, Click Here. राजीव मल्होत्रा: क्योंकि यह एक जानकारी है जिसे हमें छोड़ना नहीं चाहिए | वे केवल एक औसत दलित कार्यकर्ता नहीं हैं | हम ऐसे दलित कार्यकर्ता चाहते हैं जो वंचित लोगों की सहायता करें | परन्तु वे इसे एक ईसाई धर्मप्रचारक के रूप में कर रहे हैं जो विदेशों […]
Continue Readingनमस्ते | मैं अपने लोगों को जागृत करने के लिए व्यवस्थित रूप से एक महत्वपूर्ण विषय के बारे में बात करना चाहूंगा | हमारे प्रमुख गुरुओं पर उनके द्वारा आक्रमण किया जा रहा है जो नहीं चाहते हैं कि वे जो भी कर रहे हैं वह करें | विशेष रूप से वैसे गुरु जो दलितों, […]
Continue Readingराजीव मल्होत्रा: मैं संघ के लोगों की हत्याओं के कष्टप्रद विषय पर चर्चा करना चाहता हूँ | किसी भी व्यक्ति का मारा जाना भयानक है | परन्तु जब कहीं पर किसी ईसाई के विरुद्ध अत्याचार होता है, तो यह विश्व समाचार बन जाता है | लोग इसे एक बड़ी बात बना देते हैं | संघ […]
Continue ReadingTo Read Second Part, Click Here. प्रश्नकर्ता: इस स्वदेशी मुस्लिम की अवधारणा के लिए क्या आप पिरामिड के शीर्ष पर स्थित शिक्षित, अभिजात वर्ग को देख रहे हैं या धरातल के लोगों को भी ? राजीव मल्होत्रा: सबसे पहले मैं उन लोगों की खोज में हूँ जिनके साथ मैं बैठ सकता हूँ और अच्छी बातचीत […]
Continue Readingप्रश्नकर्ता: सभी को प्रणाम | स्वदेशी मुस्लिमों पर श्री राजीव मल्होत्रा-जी के साथ इस प्रश्नोत्तरी सत्र में आपका स्वागत है | हर कोई राजीव मल्होत्रा-जी जानता है | इसलिए, मैं उनसे परिचय कराने में बहुत अधिक समय नहीं लेने वाला हूँ | वे 1994 से अब तक अर्थात् 24 वर्षों से इस विषय पर काम […]
Continue Readingराजीव मल्होत्रा: नमस्ते ! मेरे साथ डॉ राजीव कुमार हैं | हमने भारत, उसके अतीत और भविष्य के बारे में रोचक बातचीत की है | हमने बाहरी विश्व, आधारभूत संरचना और विकास के बारे में बात की | हमने आंतरिक विश्व को भी छुआ है | आपकी कहानी बहुत ही आकर्षक है | हमें बताएं […]
Continue Readingराजीव मल्होत्रा: हम विदेशी आक्रमणकारियों के बारे में बात कर रहे थे | भारत क्यों विदेशी आक्रमणकारियों के सामने बारबार घुटने टेकता था, इसका क्या हमने भली-भाँति विश्लेषण किया है और इसे समझ लिया है, ताकि हम अपनी त्रुटियों को आगे भी न दुहराएँ ? या विदेशी आक्रमणकारियों के सामने हारने की उतनी ही संभावना […]
Continue Readingराजीव मल्होत्रा: संस्कृति और अर्थव्यवस्था परस्पर संबंधित हैं | क्या आपको लगता है कि वैश्वीकरण, संयोजकता (कनेक्टिविटी), पश्चिमीकरण, निगमीकरण और सेंसेक्स केंद्रित अर्थव्यवस्था ने हमारी संस्कृति पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है ? मोहनदास पाई: हमारी संस्कृति पर इसका प्रभाव इस सीमा तक है कि हम मानते हैं कि पश्चिम हमसे श्रेष्ठतर है | क्यों ? […]
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