ब्लोग

सबरीमाला: ईश्वर और न्यायाधीश

भारतीय न्यायपालिका को अविलम्ब हिंदू ब्रह्मांड विज्ञान पर शिक्षित करने की आवश्यकता है | यदि वे मंदिरों से संबंधित विषयों और विभिन्न हिंदू प्रथाओं पर निर्णय देते हैं तो उन्हें अधिक समझ होनी चाहिए | अन्य सभी की तुलना में हिंदू ब्रह्मांड विज्ञान के बारे में जो विशिष्ट बात है वह यह कि एक ही […]

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मस्जिद होली है, मंदिर सैक्रेड है

मस्जिद होली है, मंदिर सैक्रेड है गुड मॉर्निंग – सौरभ शाह ( मुंबई समाचार : शुक्रवार, २० जुलाई २०१८) राजीव मल्होत्राने शिवाजी पार्क के वीर सावरकर सभागृह में जो व्याख्यान दिया वह पूरे का पूरा देखने/ सुनने के लिए आप यूट्यूब सर्च कर सकते हैं. मल्होत्राने आंखें खोलेनवाली एक जबरदस्त बात अयोध्या के राम मंदिर […]

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अयोध्या विवाद और सती प्रथा

इरफ़ान हबीब पूर्व-विख्यात वामपन्थी विद्वानों में से एक है जिन्होंने अयोध्या विवाद पर बहुत कुछ लिखा है। इस विषय पर उनका लेखन बहुत विवादास्पद है। उन्होंने ऐसे हर प्रमाण को नष्ट किया है, अथवा फेंक देने, रद्द करने या अस्वीकार करने का प्रयास किया है, जो हिन्दुत्व के इस दृष्टिकोण को सत्यापित करता है कि […]

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‘आरम्भ’ सीरियल

आज मैं एक बहुत ही महत्वपूर्ण मुद्दे पर चर्चा करूंगा। मुद्दा यह है कि एक नया टीवी धारावाहिक आने वाला है जो कि काल्पनिक आर्य-द्रविड़ संघर्ष पर आधारित है। इस धारावाहिक का निर्माण मुंबई के एक बहुत ही प्रतिष्ठित समूह द्वारा किया जा रहा है। यह जानकारी इतनी महत्वपूर्ण है कि मैं चाहता हूँ कि […]

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भारतीय इतिहास पर वामपंथ का प्रभुत्व

इस व्याख्यान में, मैं दिल्ली विश्वविद्यालय में इतिहास और राजनीति विज्ञान की एक रीडर, मीनाक्षी जैन, के काम पर चर्चा करना चाहता हूँ। मैं मीनाक्षी जैन को दो दशकों से जानता हूँ और उन्हें भारतीय इतिहास और राजनीतिक मामलों के सबसे श्रेष्ठ विद्वानों में से एक मानता हूँ। उन्होंने शेल्डन पोलक पर दिल्ली में स्वदेशी […]

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‘दी बैटल फॉर संस्कृत’ (संस्कृत के लिए संघर्ष) – सारांश

बहुत समय से भारत से संबंधित (अकादमिक व सामान्य) लेखों में पश्चिमी दृष्टिकोण का प्रभाव रहा है। इन दिनों भारत के भीतर इस क्षेत्र में पश्चिमीकरण एवं पश्चिम की दखल के खिलाफ एक नयी जागरूकता का आरम्भ हुआ है। इस पुस्तक ‘बैटल फॉर संस्कृत’ (संस्कृत के लिए संघर्ष) का मूल उद्देश्य संस्कृत तथा भारतीय संस्कृति […]

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वन और रेगिस्तान की सभ्यताएँ

मैंने अपनी पुस्तक, ‘विभिन्नता: पश्चात्य सार्वभौमिकता को भारतीय चुनौती’, में चर्चा की है कि कैसे “अव्यवस्था” और “व्यवस्था” के बीच संतुलन एवं साम्यावस्था लाने का एक निरंतर प्रयास (न कि अव्यवस्था का संपूर्ण उन्मूलन) भारतीय दर्शन, कला, पाक-प्रणाली, संगीत एवं काम-विद्या को

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गुरुओं की संरक्षा महत्वपूर्ण है

हिंदू धर्म के विधायक लक्षणों में से सबसे महत्वपूर्ण लक्षण यह है कि उसके सुदीर्घ इतिहास में समय-समय पर जीते-जागते महापुरुष व्यापक पैमाने पर प्रकट होते रहे हैं। इन्हीं महापुरुषों ने सनातन धर्म को न केवल जीवित रखा, बल्कि उसे नए संजीवनी विचारों, अंतर्दृष्टियों और व्याख्याओं से ताज़ा भी किया और बदलते समयों के लिए […]

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भारत के प्राचीन पुरातात्विक स्थान

14 जून २०१६ – राजीव मल्होत्रा जी का फेसबुक लाइव इवेंट नमस्ते भारतवासियों, मुझे वापस आकर बड़ी ख़ुशी हो रही है, और आज का विषय भी बड़ा रोचक है। इसका सम्बन्ध भारत की विरासत से जुड़ा हुआ है। आज हम चर्चा करेंगे भारत के उन प्राचीन शहरों, मंदिरों व अन्य मुख्य पुरातात्विक (archaeological) स्थानों की, […]

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भारत विखंडन – द्रविड़ और दलित मामलों में पश्चिम का हस्तक्षेप

यह किताब (भारत विखंडन/Breaking India) पिछले दशक के मेरे उन तमाम अनुभवों का नतीजा है जिन्होने मेरी शोध और बौद्धिकता को प्रभावित किया है। ९० के दशक  की बात है,  प्रिंसटन विश्वविद्यालय के एक अफ्रीकन-अमरीकन विद्वान ने बातों बातों में ज़िक्र किया कि वे भारत के दौरे से लौटे हैं जहाँ वे ‘एफ्रो-दलित’ प्रोजेक्ट पर […]

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