मस्जिद होली है, मंदिर सैक्रेड है

अयोध्या राम जन्मभूमि

मस्जिद होली है, मंदिर सैक्रेड है

गुड मॉर्निंग – सौरभ शाह

( मुंबई समाचार : शुक्रवार, २० जुलाई २०१८)

राजीव मल्होत्राने शिवाजी पार्क के वीर सावरकर सभागृह में जो व्याख्यान दिया वह पूरे का पूरा देखने/ सुनने के लिए आप यूट्यूब सर्च कर सकते हैं. मल्होत्राने आंखें खोलेनवाली एक जबरदस्त बात अयोध्या के राम मंदिर के बारे में की कम से कम मेरे लिए तो ये बात बिलकुल नई थी. सभा में उपस्थित कई श्रोताओं के लिए भी यह बात नई होगी. राजीव मल्होत्राने कहा:`इस्लाम में होली (एच ओ एल वाई) स्थान (साइट्स) हैं, लेकिन सेक्रेड (एस.ए.सी.आर.ई.डी.) साइ्टस नहीं हैं. सेक्रेड स्थान किसे कहेंगे? यह एक पत्थर है जो दैवी है, डिवाइन है ऐसी हमारी श्रद्धा होती है तो वह जगह सेक्रेड हो जाती है. उस दिव्य पत्थर या मूर्ति के साथ मैं मन ही मन संवाद कर सकता हूँ, प्रार्थना कर सकता हूं, अपनी व्यथा व्यक्त कर सकता हूँ, कृतज्ञता प्रकट कर सकता हूं, कुछ मांग सकता हूं, क्योंकि मेरी यह श्रद्धा होती है कि मेरी बात इस पत्थर की मूर्ति तक पहुंच रही है, लेकिन इस्लाम में यदि कोई कहता है कि मस्जिद में अल्लाह है तो वह धर्म के विरुद्ध बात होगी. अल्लाह का निवास मस्जिद में नहीं होता बल्कि मस्जिद सिर्फ एक कम्युनिटी सेंटर है, वह इस्लाम के अनुयायियों के लिए जुटकर अल्लाह की बंदगी करने का स्थान है. यह स्थान कैसा होना चाहिए, इस बारे में कोई बंधन नहीं है. आप अपने घर में रहकर अल्लाह की बंदगी कर सकते हैं. आप रास्ते पर अल्लाह की बंदगी कर सकते हैं. आप किसी भी जगह पर अल्लाह की बंदगी कर सकते हैं, एयरपोर्ट पर अल्लाह की इबादत कर सकते हैं. आपको ऐसी किसी भी जगह पर जाने की जरूरत नहीं है जहां पर मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की विधि हुई हो. इसीलिए मस्जिद कोई सेक्रेड जगह नहीं है, होली प्लेस है. आप यदि किसी इस्लाम के अनुयायी को कहेंगे कि मस्जिद सेक्रेड जगह है तो उसकी धार्मिक भावना आहत हो जाएगी, क्योंकि सेक्रेड स्थानों पर मूर्तिपूजा होती है और इस्लाम में मूर्तिपूजा पर पाबंदी है. उसी प्रकार कुदरत का कोई भी स्वरूप इस्लाम के लिए सेक्रेड नहीं है – नदी, वृक्ष, मकान, पर्वत जैसी किसी भी चीज को इस्लाम सेक्रेड नहीं मानेगा, क्योंकि इन सभी का आकार है, जब कि उनके अनुसार अल्लाह निराकार है. हम ईश्वर को साकार रूप में भजते हैं.

मेरे पास ऐसे अनेक उदाहरण हैं जिसमें…

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